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सत्ता परिवर्तन के बाद पाटन का हाल बेहाल, सड़क के गड्ढे तक मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं जनप्रतिनिधि

करन साहू की कलम अमलेश्वर 10 सितंबर :  पाटन विधानसभा क्षेत्र में सत्ता परिवर्तन के बाद हालत बत्तर हो गई है कोई भी विकास कार्य विधानसभा में नहीं चल रही है। अधूरे कार्य को भी पूर्ण नहीं करा पा रही है स्थानीय जनप्रतिनिधि। सरपंचों को पदभार ग्रहण करे हुए महीनों बीत गए लेकिन कोई भी पंचायत में विकास कार्य नहीं चल रही है। सरपंचों का भी हाल बेहाल है। सब अपना अपना मांग पत्र कार्य योजना बनाकर शासन को भेज चुके है।और स्वीकृति की बाट जोह रहे हैं।

पाटन विधान सभा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा रोड का जाल बिछाया गया है। लेकिन रोड का मेंटेनेंस नहीं हो पा रही है। कहीं-कहीं पर मेन रोड में भी गड्ढा देखी जा रही है, उसका भी मरम्मत नहीं हो पा रही है।

नगर पालिका के अमलेश्वर क्षेत्र के ग्राम खुडमूडा से अमलेश्वर पहुंच मार्ग अत्यधिक जर्जर है, कई लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। लेकिन विभाग अनदेखी कर मरम्मत भी नहीं कर रही है। वहीं लोहरसी से चीचा पहुंच मार्ग में भी जगह-जगह सड़क पर गड्ढा देखा जा सकता है, वहां पर भी कोई कार्य नहीं की जा रही है। और भी ऐसे कई उदाहरण आपको पाटन विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिलेगा जिसका मरम्मत करने में लोक निर्माण विभाग अपना हाथ खींच रही है।

सौर ऊर्जा लाइट: ग्राम पंचायत के मुख्य चौक चौराहा पर लगे सोलर लाइट का भी हाल बेहाल है बंद पड़ी सोलर पैनल को देखने तक नहीं आ रहे हैं विभाग के अधिकारी।

छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा बनाए गए विधानसभा के स्टेडियमों का भी रखरखाव नहीं कर पा रही है विभाग, नहीं लोगों को समर्पित कर पा रही है, क्षेत्र के युवा स्टेडियम बनने के बावजूद भी बाहर में ही अभ्यास करने के लिए मजबूर हैं।

वही कही कहीं चल रहे निर्माण कार्य भी महीनों बीत जाने के बाद भी पूर्ण नहीं हो पा रही है साथ ही रानीतराई में बन रहे हैं दाऊ रामचंद्र शासकीय महाविद्यालय का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं आखिर क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इन सब मुद्दे क्यों नहीं दिखाई दे रही है। चुप्पी क्यों साधी हुई है या विभाग इनके बातों को नहीं सुन रही है,
या फिर छत्तीसगढ़ शासन।

आखिर सत्ता परिवर्तन के बाद क्यों चल रही बिजली की आंख मिचौली,बिजली की अघोषित कटौती जिसके लिए विपक्ष तो आवाज उठा रही है। साथ ही सत्ता पक्ष में भी नाराजगी देखी जा रही है ।जिस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी नाराजगी देखी जा रही है।

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