धमधा क्षेत्र के किसान पहुंचे सम्भाग आयुक्त कार्यालय दुर्ग , उच्चदाब पारेषण लाइन निर्माण में अधिकार हनन व मुआवजा गड़बड़ी को लेकर सौंपा ज्ञापन
दुर्ग: जिला दुर्ग अंतर्गत तहसील बोरी एवं धमधा क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसान सम्भाग आयुक्त कार्यालय, दुर्ग पहुंचे और उपकेंद्र रसमड़ा–सेमरिया (132/33 केवी) तथा धमधा–ठेलकाडीह (220 केवी) उच्चदाब पारेषण लाइन निर्माण में गंभीर अनियमितताओं को लेकर सांसद विजय बघेल एवं सम्भाग आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी लिमिटेड द्वारा उनकी कृषि भूमि पर बिना पूर्व सूचना, सहमति एवं विधिसम्मत मुआवजा निर्धारण के कार्य कराया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि पारेषण लाइन निर्माण विद्युत अधिनियम 2003 एवं इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 के प्रावधानों का उल्लंघन कर किया जा रहा है। अधिनियमों के अनुसार भूमि स्वामी को पूर्व सूचना, आपत्ति का अवसर तथा क्षतिपूर्ति देना अनिवार्य है, लेकिन संबंधित किसानों को न तो लिखित नोटिस दिया गया और न ही ग्राम स्तर पर कोई विधिवत सूचना जारी की गई। भारी मशीनरी के उपयोग से खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं, खेतों की समतलता एवं उर्वरता प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों को आर्थिक एवं स्थायी क्षति पहुंच रही है।
किसानों ने मांग की कि जब तक जिला कलेक्टर के माध्यम से पारदर्शी एवं विधिसम्मत मुआवजा निर्धारण कर किसानों की आपत्तियों का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक पारेषण लाइन निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही Right of Way (RoW) नीति का अनिवार्य रूप से पालन करते हुए देय मुआवजा एवं अन्य लाभ प्रदान किए जाएं तथा नियमों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों एवं ठेका एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक एवं विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर उपस्थित किसानों में नोहर सिंह देशमुख, छगन यादव, कुलेश्वर देशमुख, खेमन साहू, इंद्रजीत साहू, गौकरण साहू, गंगाधर ठाकुर, मिथलेश साहू, थानेश निषाद, त्रिलोक साहू शामिल रहे। साथ ही छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के परमानंद यादव, जिला अध्यक्ष उत्तम चंद्राकार एवं संयोजक राजकुमार गुप्त भी मौजूद थे।
जनपद सदस्य एवं किसान नेता ढालेश साहू ने अंत में कहा कि “इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत किसी भी पारेषण लाइन के निर्माण से पूर्व भूमि स्वामी को सूचना देना, उसकी आपत्तियों को सुनना और हुए नुकसान का मुआवजा देना अनिवार्य है। धमधा और बोरी क्षेत्र में इन कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर किसानों की जमीन पर जबरन कार्य कराया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 300-ए के अंतर्गत संपत्ति के अधिकार का खुला उल्लंघन है। यदि प्रशासन ने शीघ्र हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई और न्यायोचित मुआवजा सुनिश्चित नहीं किया, तो किसान आंदोलन करने की बाध्य रहेंगे।”






