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ध्रुव चरित्र की कथा भगवान विष्णु के महान भक्त ध्रुव की है/पंडित कृष्ण कुमार

पाटन। नगर पंचायत पाटन ,वार्ड क्रमांक 06 शान्ति चौक में देवांगन परिवार के द्वार श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है,आज दुसरे दिन कथा बताते हुए पं.कृष्ण कुमार तिवारी जी,पाटन वाले महाराज श्री ने सृष्टि वर्णन की कथा , मनु शतरुपा से मानव सृष्टि विस्तार की कथा व सती चरित्र की कथा सुनाये ,

सती, प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं, प्रजापति दक्ष जी की 16 पुत्री में सबसे छोटी 16 वें नम्बर की पुत्री थी , माता सती जी शिव जी से विवाह किया, जो उनके पिता को पसंद नहीं था।

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जानबूझ श्री शिव जी जो को अपमानित करने की दृष्टि से दक्ष जी ने एक यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने शिव और सती को आमंत्रित नहीं किया.फिर भी सती अपने पिता के घर चली गईं, जहाँ शिव जी व उनका अपमान हुआ।

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अपमान सहन न कर पाने पर, सती ने अपने पति के सम्मान और अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए यज्ञ में योगाग्नि बल द्वारा देह त्याग कर दिया ,

शिव जी क्रोधित होकर अपने प्रधान गण वीरभद्र जी को भेज कर सब को दंड दिये , फिर बाद में सब क्षमा याचना कि तो भगवान ने दक्ष को नया जीवन प्रदान किया और बकरे वाला सिर दिया।।

ध्रुव चरित्र की भी कथा सुनाते बताया कि धुव्र 5 वर्ष की अवस्था में श्रीनारद जी के द्वारा प्राप्त मंत्र के द्वारा भगवान की भक्ति कर के वरदान व अनुपम स्थान पाया ।।

ध्रुव चरित्र की कथा भगवान विष्णु के महान भक्त ध्रुव की है, जिन्हें सौतेली माँ सुरुचि के तिरस्कार के कारण बचपन में ही घर छोड़ना पड़ा; कठोर तपस्या के बाद विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें ध्रुव तारे के रूप में अटल स्थान प्रदान किया, जो उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक बन गया।।

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