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विश्व पर्यावरण दिवस पर “खेत बचाओ अभियान” का शुभारंभ – मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती एवं नवाचारों को बढ़ावा देने का आह्वाहन

दुर्ग,पाटन। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग अंतर्गत उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, संकरा पाटन में “खेत बचाओ अभियान” का शुभारंभ कृषि मंत्री छत्तीसगढ़ शासन रामविचार नेताम एवं दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में कृषि सभापति, जिला पंचायत दुर्ग, ग्राम पंचायत सरपंच रवि सिंगौर अन्य  जनप्रतिनिधिगण, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ हुआ। इसके पश्चात् अतिथियों ने कृषि, उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक एवं मृदा स्वास्थ्य से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा कृषकों को कृषि आदान सामग्री का वितरण किया।

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इस अवसर पर माननीय मुख्य अतिथि द्वारा विश्वविद्यालय की विभिन्न महत्वपूर्ण उपलब्धियों एवं प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। इनमें विश्वविद्यालय कुलगीत, एआई आधारित वेब पोर्टल, उद्यानिकी एवं वानिकी से संबंधित विश्वविद्यालय के सभी 09 संकायों की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों का संकलन, विश्वविद्यालय विजन-2047 दस्तावेज, तथा “फ्लोरा न्यूज़” का विमोचन शामिल था। विमोचन के अवसर पर माननीय कृषि मंत्री ने विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं कृषक हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रदेश में उद्यानिकी एवं वानिकी विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।

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अपने उद्बोधन में कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध कृषि की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, इसलिए प्राकृतिक खेती, जैविक संसाधनों के उपयोग तथा मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल संसाधनों के समुचित उपयोग तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित नवाचारों एवं तकनीकी पहलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये प्रयास कृषि क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेंगे।

सांसद  विजय बघेल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि भूमि, जल और जैव विविधता का संरक्षण भविष्य की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक तकनीकों के साथ प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे विस्तार कार्यों की सराहना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति महोदय ने कहा कि “खेत बचाओ अभियान” मृदा, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्राकृतिक खेती, जैव उर्वरक उत्पादन, समन्वित कृषि प्रणाली, जलवायु अनुकूल कृषि तथा उद्यानिकी एवं वानिकी आधारित आजीविका संवर्धन पर निरंतर अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियां संचालित कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का विजन-2047 प्रदेश में कृषि, उद्यानिकी एवं वानिकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का रोडमैप प्रस्तुत करता है।

कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों के लिए मृदा परीक्षण, जैव उर्वरकों के संवर्धन, प्राकृतिक खेती की विधियों के जीवंत प्रदर्शन तथा फल एवं सब्जी फसलों में समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन विषयों पर तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए गए। कृषकों, विद्यार्थियों ने इन सत्रों में सक्रिय सहभागिता करते हुए नवीन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा मंत्री जितेन्द्र वर्मा, जिला भाजपा उपाध्यक्ष श्रीमती हर्षा लोकमनी चंद्राकर, दिलीप साहू, मंडल अध्यक्ष कमलेश चंद्राकर, नगर पालिका अम्लेश्वर अध्यक्ष दयानंद सोनकर, जनपद सासंद प्रतिनिधि राजेश चंद्राकर, सांसद प्रतिनिधि राजा पाठक,नगर पालिका अम्लेश्वर सांसद प्रतिनिधि कुलदीप बैसवाडे, मंडल महामंत्री कैलाश यादव, पूर्व मंडल अध्यक्ष लोकमनी चंद्राकर,डॉ आलोक पाल,राजू सोनकर, धर्मेंद्र सोनकर,अजीत ठाकुर, रामाधार साहू, नारायण शर्मा, सुनील शर्मा, कामता प्रसाद सिंगौर, छोटू यादव, दुर्बाशा साहू साहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, संचालक, वैज्ञानिक, प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने मृदा संरक्षण, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संवर्धन तथा कृषि नवाचारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की विकास दृष्टि को भी प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।

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