अमलेश्वर में अवैध कब्जों का बढ़ता जाल, कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में आक्रोश, आखिर कब चलेगी बुलडोजर
अमलेश्वर। दुर्ग जिले के नगर पालिका परिषद अमलेश्वर क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों को लेकर नगरवासियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी अवैध कब्जों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। लोगों का सीधा सवाल है कि आखिर नगर में फैले अवैध कब्जों पर बुलडोजर कब चलेगा।
सूत्रों के अनुसार सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के पार्षदों द्वारा समय-समय पर अवैध कब्जों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है। नगरवासियों ने इसे जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपेक्षा करार देते हुए सवाल उठाया है कि राजस्व विभाग अवैध कब्जों को हटाने से आखिर क्यों पीछे हट रहा है।



नागरिकों का कहना है कि पाटन तहसीलदार अमलेश्वर पहुंचकर पटवारी कार्यालय में प्रकरणों की जानकारी लेते हैं और फिर वापस लौट जाते हैं, लेकिन अवैध कब्जों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं और सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बटालियन पेट्रोल पंप के सामने बड़े भूभाग पर हुए अवैध कब्जे को हटाने में पालिका प्रशासन असफल रहा है। इस मामले में सत्ता पक्ष के एक पार्षद ने भी लिखित शिकायत की थी, लेकिन केवल कागजी कार्रवाई कर मामले को समाप्त कर दिया गया। आरोप है कि केवल सामने की दीवार तोड़ी गई, जबकि पूरा परिसर आज भी चेकर टाइल्स लगाकर कब्जे में बना हुआ है।
इसी प्रकार अमलेश्वर के हृदय स्थल अटल चौक से लेकर मेन रोड, प्रगति विहार कॉलोनी के आसपास, व्यवसायिक परिसरों के समीप, अमलेश्वर-खुडमुड़ा मार्ग, शीतला विहार क्षेत्र तथा अमलेश्वर-पाहंदा मार्ग पर भी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नागरिकों का आरोप है कि रसूखदार लोगों द्वारा किए गए इन कब्जों पर कार्रवाई करने से राजस्व विभाग बचता नजर आ रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी पार्षदों ने नगर पालिका परिषद अमलेश्वर की बैठक का बहिष्कार करते हुए अवैध कब्जों पर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन आज तक न तो उनकी मांग पर सुनवाई हुई और न ही सत्ता पक्ष के पार्षदों द्वारा दिए गए आवेदनों का निराकरण हो सका है।
अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं होने से नगर पालिका प्रशासन और पाटन तहसीलदार की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। अब नगरवासी इस इंतजार में हैं कि आखिर अमलेश्वर में फैले अवैध कब्जों पर प्रशासन का बुलडोजर कब चलेगा।



