बिना सिविक सेंस के भारत 2047 में विश्व का नेतृत्व नहीं कर सकता- जस्टिस गौतम चौरडिया
कुम्हारी। विचक्षण जैन विद्यापीठ में विजन 360° लीडरशिप लेक्चर सीरीज़ के अंतर्गत दूसरा व्याख्यान प्रज्ञायतन हॉल में आयोजित हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में छत्तीसगढ़ स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन के अध्यक्ष एवं हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस, जस्टिस गौतम चंद चौरडिया उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में उन्होंने “सिविक सेंस एंड लॉ बिल्डिंग द फाउंडेशन ऑफ रिस्पॉसीबल सिटिजनशिप” विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में लाने और वर्ष 2047 तक विश्व का नेतृत्व करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए सबसे पहले नागरिकों को अपने व्यवहार में सिविक सेंस विकसित करना होगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा, “बिना सिविक सेंस के चाहे हम कितनी भी आर्थिक उन्नति कर लें, दुनिया हमें थर्ड वर्ल्ड कंट्री के रूप में ही देखेगी। विकास का असली आधार नागरिकों का जिम्मेदार आचरण है।”
सड़क पर थूकना, लाइन तोड़ना—कई आदतें विकास में बाधक
जस्टिस चौरडिया ने भारतीय समाज में व्याप्त अनेक व्यवहारगत कमियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर थूकना, कचरा फैलाना, कतारों का पालन न करना, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन, पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुँचाना और भ्रष्टाचार जैसी प्रवृत्तियाँ देश की प्रगति को धीमा करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान ने हमें कानून का सुदृढ़ ढाँचा दिया है, लेकिन जब तक नागरिक स्वयं अनुशासन और जिम्मेदारी अपनाकर बदलाव नहीं लाएंगे, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं है।
इंटरैक्टिव सत्र में विद्यार्थियों ने पूछे महत्वपूर्ण प्रश्न
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रश्न पूछकर विषय पर गहरी समझ विकसित की। जस्टिस चौरडिया के उत्तरों ने छात्रों को यह महसूस कराया कि सिविक सेंस केवल कानून का पालन भर नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है जो समाज को बेहतर बनाती है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यापीठ के अध्यक्ष राजेश सावनसूखा, प्रिंसिपल ए. पी. सिंह, ट्रस्टीगण विजय मालू, सुनील गोलछा, अनिल लोढ़ा, ऋषभ कोटडिया, गौरव गोलछा, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मुख्य अतिथि का गरिमामय स्वागत किया।
विजन 360° के अंतर्गत आयोजित यह व्याख्यान न केवल ज्ञानवर्धक रहा बल्कि विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक भी सिद्ध हुआ।






